बकरा ईद कब मनाई जाती है / bkra id kb hai /kaise mnaye in hindi

बकरा ईद कब मनाई जाती है 


आज हम आपके लिए इस्लामिक त्योहार ईद उल अधा (बकरा ईद) के बारे मे पूरी जानकारी बतायेंगे|


Aaj ham apke liy islamik tyohar id ul adha ( bakra id) ke bare me poori jankari btayenge 


बकरा ईद क्या है?


ईद उल अधा जिसे हम (बकरा ईद) भी कहते हैं बकरा ईद एक मुस्लिम त्योहार है,मुस्लिम लॉग इस त्योहार के लिए काफ़ी उत्सुक रहते हैं,क्यूकि इस त्योहार पर मुस्लिम लोग काफ़ी सारी नई नई चिजे करते हैं|


Id ul adha jise ham( bakra id)bhi khte hain bakra id ek muslim tyohar hai, Muslim log is tyohar ke liy kafi utsuk rhte hain is tyohar par muslim log kafi sari nayi nayi chije krte hain.


bakra id 


wishing for sona 

Sona        wishes for manu 


monu 


Sona birthday 


Happy birthday dear sona 

बकरा ईद केसे मनाते है


1.बकरा ईद पे मुस्लिम लोग काफ़ी सारी चिजे करते हैं जैसे सबसे पहले वह सुबह की नमाज़ पड़ते है जिसे फजर की नमाज़ कहते है सुबह की नमाज काफ़ी जरुरी होती है मुस्लिम लोग मानते है I की जो सुबह की नमाज़ अदा नहीं करते उनकी ईद की नमाज़ पड़ने का कोई फायदा नहीं होता इसी लिए सुबह की नमाज़ पढ़ना बहुत जरुरी है|


Bkra id par muslims log kafi sari chije krte hain jaise sabse phle vah subah ki namaz pdte hain jise fazar ki namaz khte hain. Subah ki namaz kafi jaruri hoti hai. Muslim log mante hain

Ki jo subah ki namaz ada nhi krte unki id ki namaz pdne ka koi fayda nhi hota isi liy subah ki namaz pdna jruri hota hai 

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2.सुबह की नमाज़ पड़ने के बाद,मुस्लिम लोग मस्जिद और ईद गाह में ईद की नमाज़ के लिए जाते है बहा पर हाफिज कारसाहब जो नमाज़ पढ़ाते है,वह सभी लोगो को अच्छी अच्छी बाते बताते है जैसे नमाज़ कैसे पड़ते है, क्यों पड़ते है, नमाज़ के बारे में और इस्लाम के बारे में बताते है,उसके बाद ईद की नमाज पढ़ते हैं,नमाज के पढ़ने के बाद सभी एक दुसरे के गले लगकर और हाथ मिला कर ईद की मुबारकबाद (बधाई)देते है|


Subah ki namaz pdne kw bad muslim log masjid or idgah me id ki namaz ke liy jate hain wahan par hafiz karsahab jo namaz pdate hain. Vah sabhi logo ko achi achi bate btate hain jaise namaz kaise pdte hain.  Kyu pdte hain namaz ke bare me or islam ke bare me btate hain uske bad id ki namaz pdte hain. Namaz pdne ke bad sabhi ek dusre ke gale lgkar or hath milakar id ki Mubarak bad dete hain.

bakra id in hindi for you

3.ईद की नमाज़ के बाद सभी लोग घर जाकर अपने जानवरो को अल्लाह के लिए कुर्बान कर देते है जिस जानवर को बो काफी समय से खाना पानी दे कर पाल रहे थे उस जानवर को बो कुर्बान कर देते है, उस जानवर के मीट को बो लोग तीन हिस्सों में बाट लेते है,जिसका पहला हिस्सा गरीबों के लिए और दूसरा हिस्सा मेहमानों के लिए रखते है और तीसरा हिस्सा अपने लिए रखते है|


Id ki namaz ke bad sabhi log ghar jakar apne janvaro ko allah ke liy kurvan kr dete hain jis janvar ko vo kafi samay se khana pani dekar pal rhe the. Us janvar ko vo kurvan kr dete hain.Us janvar ke meet ko vo log teen hisso me bant lete hain. Jiska phla hissa gareevo ke liy dusra hissa mehmano ke liy rakhte hain. Or teesra hissa apne liy rakhte hain 


id ki mubarakbad 


4..क़ुरबानी सिर्फ बकरा,बकरी,भेसा,भेस,ऊँट,ऊंटनी,भेड़ और कुछ जानवरों की ही होती है!

.जो हिस्सा अपने और मेहमानो के लिए रखते है उस मीट के वह काफी सारे नए नए पकबान बनाते है जैसे, बिरयानी,कोरमा,और बहुत सारे नए नए पकबान बनाते है,और उसपर अल्लाह की नियाज (दुआ) लगवाने के बाद मेहमानो व रिस्तेदारो को खिलाते है|


Jo hissa apne or mehmano ke liy rakhte hain us meet ke vah kafi sare naye naye pakvan bnate hain Viryani, korma, or bahut sare naye naye pakvan bnate hain or us par allah ki niyaj ( dua) lgvane ke bad mehmano va rishtedaro ko khilate hain.

id mubarak

5.क़ुरबानी का पहला हिस्सा जो गरीबों के लिए रखते है उसे बाद में गरीबों को देने के लिए जाते है और सब गरीबो को ईद का मीट देते है|


Kurvani ka phla hissa jo gareevo ke liy rakhte hain use bad me gareevo ko dene ke liy jate hain. Or sab gareevo ko id ka meet dete hain.


बकरा ईद क्यों मनाते है?


बकरा ईद त्यौहार मनाते है क्यूकि आजसे हज़ारो साल पहले की बात है अल्लाह के एक नबी जिनका नाम हज़रत इब्राहीम अली हिस्सलाम था एक रात सोए तो उन्हें खुआब (सपना) आया


Bakra id ka tyohar mnate hain kyuki aaj se hazaro sal polo phle ki bat hai allah ke ek navi jinka naam hazrat ibrahim ali hisslam tha ek rat soye to unhai khuaab(sapna) aaya


 कि अल्लाह उनसे उनकि सबसे अज़ीज़ (कीमती,प्यारी) चीज़ की क़ुरबानी मांग रहे है,तो हज़रात इब्राहिम अली हिस्सलाम ने अगली सुबह अपनी 100 ऊंटों को अल्लाह के लिए कुर्बान कर दिया क्युकी इब्राहिम अली हिस्सलाम ऊँटो के ब्यापारी थे


Ki allah unse unki sabse ajeej ( keemti, pyari) chij ki kurvani mang rhe hain to hazrat Ibrahim ali hisslam ne agli subah 100 unto ko allah ke liy kurvan kr diya. Kyuki ibrahim ali hisslam unto ke vyapari the.


उन्हें ऊँट बहुत प्यारी थी,लेकिन अगली रात को दोबारा उन्हें वही खुआब (सपना) आया और हज़रत अली हिस्सलाम ने अगली सुबह अपनी 200 ऊंटों को कुर्बान कर दिया,उसके बाद तीसरी रात को दोबारा उन्हें वही खुआब (सपना) आया तो!


Unhai unt bhut pyare the, lekin agli rat ko dobara unhai khuaab aaya or hazrat ali hissalam ne agli subah apni 200 unto ko kurvan kr diya uske bad teesri rat ko dobara unhai khuaab aaya to 


उन्हें समझ आ गया कि अल्लाह उनसे उनकी सबसे अज़ीज़ चीज उनका इकलौता बेटा स्माइल है तो क्या अल्लाह मुझसे मेरे बेटे की क़ुरबानी चाहता है,ये कहकर हज़रात इब्राहिम अली हिस्सलाम अगली सुबह अपनी बीवी से कहते है


Unhai smajh aa gya ki allah unse unki azzez chij unka iklota beta smile hai to kya allah mujhse mere bete ki kurvani chahta hai ye khkar hazrat imrahim ali hisslam agli subah apni bibi se khte hain.


की मेरे बेटे को अच्छी तरह सजा दो आज हम अपने दोस्त के घर खाने पर जाएंगे, यह कहकर हज़रात अली हिस्सलाम अपने बेटे स्माइल को लेकर मक्का की ओर चल पड़े |


Ki mere bete ko achi tarah se saza do aj ham apne dost ke ghar khane par jayenge. Yah khkar hazrat ali hisslam apne bete smile ko lekar makka ki or chal pade 


रास्ते में उन्हें शैतान बार बार कह रहा था कि तेरा एक ही बेटा स्माइल है उसे ही अल्लाह के लिए कुर्बान करदेगा क्या!तो हज़रत अली हिस्सलाम ने कहा अल्लाह के लिए ऐसे हज़ार स्माइल कुर्बान है,


Raste me unhai saitan bar bar kh rha tha ki tera ek hi beta smile hai use bhi allah ke liy kurvan kr dega kya to hazrat ali hissalam ne kaha allah ke liy ese hazar smile kurvan.


और अपने बेटे स्माइल से कहा मेरे अज़ीज़ बेटे में तुम्हे अल्लाह की राह में कुर्बान करने जारहा हु,तो बेटे स्माइल ने कहा बाबा मेरे लिए इससे बेहतर क्या होगा की मुझे एक अल्लाह का नबी अल्लाह की राह में कुर्बान करे,


Or apne bete smile se kha mere azeez bete main tumhai allah ki rah me kurvan krne ja rha hun to bete smile ne kaha ki baba mere liy isse behtar kya hoga ki mujhe ek allah ka navi allah ki rah me kurvan kare.


इसके बाद हज़रत इब्राहिम अली हिस्सलाम ने अपनी आंखो से पट्टी बंदली क्युकी वह अपने बेटे को ऐसी हालत में नहीं देख सकते,उसके बाद इब्राहिम अली हिस्सलाम ने स्माइल को एक जगह लेटाकर आसमान में देखकर कहा |


Iske bad hazrat ibrahim ali hisselam ne apni ankho se patti badli. Kyuki vah apne bête ko esi halat me nhi dekh sakte uske bad ibrahim ali hisslam ne smile ko ek jagah letakar aasman me dekha 


ऐ अल्लाह देख अगर तू मुझे हज़ार स्माइल देता तो में हज़ार स्माइल कुर्बान करदेता!ऐसे कहकर हज़रात इब्राहिम अली हिस्सलाम स्माइल की गर्दन पर छुरी चला ने ही बाले थे


Ai allah dekh agar tu mujhe hazar smile deta to main hazar smile kurvan kr deta. Ese kahkar hazrat ibrahim ali hisslam smile ki gardan par chhuri chalane hi bale the.


तभी अल्लाह ने अपने एक फरिश्ते से कहा कि जन्नत से एक जानवर लेजाकर इब्राहीम के बेटे स्माइल की जगह रख दो


Tabhi allah ne apne ek farishte se kaha ki jannat se ek janvar le jakar ibrahim ke bete smile ki jagah rakh do.


तभी हज़रात इब्राहिम अली हिस्सलाम ने छुरी चला दी खून निकल रहा था और पट्टी खुली तो देखा बेटा स्माइल सही सलामत है और उसकी जगह एक दुम्बा(भेड़)बहा पर है|

Tabhi hazrat ibrahim ali hisslam ne churi chala di khoon nikal rha tha. Or patti kholi to dekha beta smile sahi salamat hai or uski jagah ek dumba ( bhed) wahan par hai 

तभी अचानक आसमान से आवाज़ आती है! ऐ इब्राहिम तुम्हारे इस इम्तिहान को क़यामत तक याद रख्खा जायगा,और तेरी इस क़ुरबानी को सभी ईमान बाले (मुस्लिम) हर साल मनायेंगे और अल्लाह की राह में क़ुरबानी पेश करेंगे,तभी से ये सिलसिला शुरु हुआ|


Tabhi achanak aasman se abaz aayi ai ibrahim tumhare is imtihaan ko kayamat tak yad rakha jayega or teri is kurvani ko sabhi iman bale ( muslim) har sal manayenge or allah ki rah me kurvani pesh karenge tabhi se ye silsila shuru hua.


बकरा ईद कब मनाई जाती है?


(बकरा ईद) ईद उल फ़ित्र से दो महीने दस दिन बाद मनाई जाती है 

जो ज्यादातर जुलाई महीने में ही आती है||


(Bakra jd ) id ul fitra se do maheene das din bad mnai jati hai .jo jyatar july maheene me hi aati hai.




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